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    *भिलाई के सेंट थॉमस कॉलेज में “पीस वीक” की पहल: युवाओं को अहिंसा और शांति का संदेश*

    भिलाई।

    सेंट थॉमस कॉलेज, भिलाई में पीस क्लब के बैनर तले एवं शिक्षा विभाग के सहयोग से “पीस वीक” का आयोजन किया गया। इस पहल का उद्देश्य युवाओं में सद्भाव, सहानुभूति और अहिंसा के मूल्यों को विकसित करना है। सप्ताहभर चलने वाले इस कार्यक्रम में बी.एड. के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और विश्व के प्रसिद्ध शांति दूतों के जीवन एवं उनके योगदान पर प्रभावशाली प्रस्तुतियाँ दीं।

    कार्यक्रम के दौरान श्री श्री रविशंकर, मलाला यूसुफजई, मार्टिन लूथर किंग जूनियर, महात्मा गांधी, दलाई लामा, कैलाश सत्यार्थी और नेल्सन मंडेला जैसे महान व्यक्तित्वों के विचारों और कार्यों को विस्तार से साझा किया गया। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से छात्रों को शांति, मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी के महत्व से अवगत कराया गया।

    6 अप्रैल को आयोजित उद्घाटन समारोह में कॉलेज के प्रशासक फादर डॉ. पी. एस. वर्गीज, प्राचार्या डॉ. शाइनी मेंडोन्से, डीन ऑफ अकैडमिक्स डॉ. देबजानी मुखर्जी, शिक्षा विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. दीप्ति संतोष तथा पीस क्लब संयोजक डॉ. रीमा देवांगन की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी ने इस पहल की सराहना करते हुए छात्रों को शांति और अहिंसा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।

    7 अप्रैल को मुख्य व्याख्यान मनोविज्ञान विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. निम्मी वर्गीज द्वारा दिया गया। वे यूनिवर्सिटी ऑफ रोड आइलैंड, अमेरिका से शांति और अहिंसा में प्रमाणित प्रशिक्षक हैं। उनका सत्र मार्टिन लूथर किंग जूनियर के विचारों पर केंद्रित रहा। सत्र की शुरुआत एक ध्यान गतिविधि से हुई, जिसने प्रतिभागियों को नकारात्मक सोच से सकारात्मक दृष्टिकोण की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

    डॉ. वर्गीज ने अपने व्याख्यान में स्पष्ट किया कि शांति केवल संघर्ष की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि न्याय और समग्र कल्याण की स्थिति है। उन्होंने नकारात्मक और सकारात्मक शांति की अवधारणाओं को समझाते हुए विभिन्न प्रकार की हिंसा—विशेषकर मनोवैज्ञानिक और पारस्परिक संघर्ष—पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने “नॉन-वायलेंस” और “नॉनवायलेंस” के बीच अंतर को रेखांकित करते हुए “नॉनवायलेंस” को एक सक्रिय और परिवर्तनकारी शक्ति बताया।

    कार्यक्रम के समापन पर यह संदेश दिया गया कि शांति केवल एक विचार नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका है। मार्टिन लूथर किंग जूनियर के विचारों से प्रेरित होकर छात्रों को शांति दूत के रूप में समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहने का आह्वान किया गया।

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