
बिलासपुर।
शहर के निजी शिक्षा क्षेत्र में तेजी से अपनी पहचान बनाने वाला Narayana e-Techno School अब गंभीर विवादों के घेरे में आ गया है। स्कूल की स्थापना को अभी करीब एक वर्ष ही हुआ है, लेकिन शुरुआत से ही इस पर मान्यता, फीस वसूली और शिक्षा नियमों के उल्लंघन जैसे आरोप लगते रहे हैं। अब यह मामला और गंभीर तब हो गया जब CBSE मान्यता को लेकर बड़े खुलासे सामने आए हैं।
CBSE नाम पर एडमिशन, बाद में मिली मान्यता
आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने शुरुआत से ही खुद को CBSE पैटर्न पर आधारित बताकर बड़ी संख्या में छात्रों का एडमिशन लिया और अभिभावकों से मोटी फीस वसूली की। जबकि उस समय स्कूल के पास CBSE की आधिकारिक मान्यता नहीं थी।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि स्कूल को CBSE मान्यता पूरे एक शैक्षणिक सत्र के बाद प्राप्त हुई।
इस तथ्य की पुष्टि खुद स्कूल प्रबंधन ने हाल ही में आयोजित प्रेस वार्ता में की। लगातार मीडिया में चल रही खबरों के दबाव में प्रबंधन ने जल्दबाजी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की, लेकिन इससे विवाद और बढ़ गया।
अभिभावकों में नाराजगी, ठगा महसूस कर रहे लोग
इस खुलासे के बाद अभिभावकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। कई अभिभावकों का कहना है कि उन्हें शुरुआत में यह जानकारी नहीं दी गई कि स्कूल को CBSE की मान्यता प्राप्त नहीं है।
एक अभिभावक ने नाराजगी जताते हुए कहा,
“अगर हमें पहले ही पता होता कि स्कूल को CBSE की मान्यता नहीं है, तो हम अपने बच्चों का एडमिशन यहां कभी नहीं कराते।”
अभिभावकों का आरोप है कि उन्हें भ्रमित कर एक साल तक लाखों रुपये की फीस वसूली गई, जो सीधे तौर पर विश्वास के साथ खिलवाड़ है।
गंभीर अनियमितताओं के आरोप
स्कूल प्रबंधन पर निम्नलिखित आरोप लगाए जा रहे हैं:
बिना वैध CBSE मान्यता के स्कूल संचालन
CBSE स्कूल बताकर अभिभावकों से मोटी फीस वसूली
सोसाइटी पंजीयन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी
दस्तावेजी हेरफेर और वित्तीय अनियमितताओं की आशंका
ये सभी आरोप यदि सही साबित होते हैं, तो यह मामला सिर्फ नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एक बड़े शैक्षणिक घोटाले का रूप ले सकता है।
कानूनी कार्रवाई की संभावना
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो स्कूल प्रबंधन पर धोखाधड़ी (IPC 420) सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया जा सकता है। इसके अलावा शिक्षा विभाग द्वारा मान्यता निरस्त करने, जुर्माना लगाने और अन्य प्रशासनिक कार्रवाई भी संभव है।
प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
इतने गंभीर आरोपों के बावजूद अब तक शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
जांच और कार्रवाई की मांग तेज
नाराज अभिभावक अब इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी संस्था द्वारा इस तरह अभिभावकों को गुमराह न किया जा सके।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कब और कितनी सख्ती दिखाता है, क्योंकि यह सिर्फ एक स्कूल का मामला नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है।
