
बिलासपुर। बहुचर्चित सर्पदंश प्रकरण में सरकारी राशि के कथित घोटाले की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं। इसी क्रम में कुछ महत्वपूर्ण लोगों से प्रस्तावित पूछताछ फिलहाल प्रशासनिक कारणों से टल गई। मंगलवार को राजस्व विभाग और पुलिस अधिकारियों की अलग-अलग बैठकों के चलते पूछताछ आगे नहीं बढ़ सकी, लेकिन जांच टीम इसे मामले की अहम कड़ी मान रही है।
पुलिस अब जेल में बंद आरोपियों की भूमिका का अन्य मामलों से भी मिलान कर रही है। जांच इस दिशा में भी आगे बढ़ रही है कि कहीं इसी नेटवर्क ने अन्य योजनाओं में भी समान कार्यप्रणाली अपनाकर सरकारी राशि का दुरुपयोग तो नहीं किया। इसके लिए वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों, मोबाइल डेटा और डिजिटल साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया जा रहा है।
अब तक की जांच में डॉ. प्रियंका सोनी, महेंद्र मनहर, गोविंद विश्वकर्मा, हीराप्रसाद खांडेकर, कुश कुमार गुप्ता, नरेंद्र कौशिक, हरिशंकर राठौर, गरीबराम बिंझवार, रामकुमार पाटनवार और रामेश्वर भास्कर सहित कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस का दावा है कि कथित सर्पदंश घोटाले में एक संगठित नेटवर्क सक्रिय था, जिसकी विभिन्न स्तरों पर भूमिका की अलग-अलग जांच की जा रही है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि जैसे-जैसे नए साक्ष्य सामने आ रहे हैं, वैसे-वैसे मामले का दायरा भी बढ़ता जा रहा है। आने वाले दिनों में इस बहुचर्चित सर्पदंश घोटाले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
