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    *अपोलो बिलासपुर में गैस्ट्रो इलाज की नई उड़ान, 61 हजार से ज्यादा प्रोसीजर्स के साथ जुड़ी अत्याधुनिक तकनीकें*

    बिलासपुर। अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर ने गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और जीआई सर्जरी के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल में अब तक करीब 61 हजार से अधिक गैस्ट्रो प्रोसीजर्स सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं। इसके साथ ही अस्पताल में आधुनिक तकनीकों से लैस नई सुविधाओं का विस्तार किया गया है, जिससे अब मरीजों को जटिल पेट एवं पाचन संबंधी बीमारियों की जांच और उपचार के लिए बड़े महानगरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।

    अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर का गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग उत्तरी छत्तीसगढ़ के लगभग 14 जिलों, मध्यप्रदेश के 4 जिलों और ओडिशा के 3 जिलों के मरीजों को उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहा है। अस्पताल में पहले से एंडोस्कोपी, कोलोनोस्कोपी, सिग्मायडोस्कोपी, फ्लोरोस्कोपी, फाइब्रोस्कैन, लिवर बायोप्सी, ईआरसीपी एवं स्क्लेरोथेरेपी जैसी सुविधाएं उपलब्ध थीं, वहीं अब नई अत्याधुनिक तकनीकों के शामिल होने से इलाज और भी सटीक एवं प्रभावी हो गया है।

    गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ. सीतेंदू पटेल ने बताया कि अस्पताल में शुरू की गई एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (EUS) तकनीक के माध्यम से भोजन नली, पेट, अग्नाशय, पित्ताशय और आसपास की संरचनाओं की बेहद सूक्ष्म जांच संभव हो पा रही है। उन्होंने कहा कि यह तकनीक अग्नाशय कैंसर, पित्त नली की समस्याओं और पेट के अंदरूनी ट्यूमर के शुरुआती निदान में काफी उपयोगी साबित हो रही है।

    वहीं उदर रोग विशेषज्ञ डॉ. आकाश गर्ग ने बताया कि एसोफेगल मेनोमेट्री जांच भोजन नली की कार्यप्रणाली को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जिन मरीजों को निगलने में परेशानी, लगातार एसिडिटी, सीने में जलन या एसिड रिफ्लक्स जैसी समस्याएं होती हैं, उनके लिए यह जांच अत्यंत लाभकारी है।

    उदर रोग विशेषज्ञ डॉ. समर्थ शर्मा ने जानकारी दी कि कैप्सूल एंडोस्कोपी एक आधुनिक और बिना दर्द वाली जांच तकनीक है। इसमें मरीज को कैप्सूल के आकार का एक छोटा कैमरा निगलना होता है, जो शरीर के भीतर जाकर छोटी आंत की तस्वीरें लेता है। इससे उन बीमारियों का भी पता लगाया जा सकता है, जो सामान्य एंडोस्कोपी में दिखाई नहीं देतीं। उन्होंने कहा कि यह तकनीक बिना सर्जरी के बेहद प्रभावी परिणाम देती है।

    जीआई सर्जन डॉ. लाजपत अग्रवाल ने कहा कि अस्पताल में आधुनिक मशीनों के शामिल होने से बीमारियों के सटीक डायग्नोसिस और जटिल सर्जरी में काफी सहायता मिलेगी। उन्होंने बताया कि अपोलो हॉस्पिटल की गैस्ट्रो केयर टीम और जीआई सर्जरी विशेषज्ञों की संयुक्त सेवाओं के माध्यम से मरीजों को एंडोस्कोपिक उपचार, लिवर एवं पैंक्रियास रोगों का उन्नत इलाज और जटिल गैस्ट्रो सर्जरी जैसी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।

    विशेषज्ञ चिकित्सकों ने लोगों से संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और समय पर भोजन की आदत अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि हरी सब्जियां, फल, फाइबर युक्त भोजन और पर्याप्त पानी का सेवन पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक होता है। साथ ही धूम्रपान और शराब से दूरी बनाए रखना भी जरूरी है।

    डॉक्टरों ने सलाह दी कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार पेट दर्द, एसिडिटी, भूख में कमी, तेजी से वजन घटना, निगलने में परेशानी, उल्टी या मल त्याग में अनियमितता जैसी समस्याएं बनी रहती हैं, तो तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श लेना चाहिए। आधुनिक तकनीकों और अनुभवी विशेषज्ञों की मदद से आज कई गंभीर बीमारियों का शुरुआती चरण में सफल उपचार संभव हो चुका है।

    कार्यक्रम के अंत में डॉ. अनिल कुमार गुप्ता, चिकित्सा अधीक्षक, अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर ने सभी विशेषज्ञों एवं उपस्थित लोगों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

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