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    *सेंट थॉमस महाविद्यालय के शिक्षा विभाग द्वारा राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन*

    सेंट थॉमस कॉलेज, भिलाई के शिक्षा विभाग द्वारा “एनईपी 2020 के अंतर्गत शिक्षक शिक्षा का रूपांतरण: शक्तियां, चुनौतियां एवं अवसर” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. हरिकेश सेनापति (पूर्व निदेशक, एनसीईआरटी), डॉ. अलका पांडा (एनसीईआरटी, रायपुर) तथा डॉ. शिशिरकान्त भट्टाचार्य (सहायक प्राध्यापक, डी.आई.ई.टी., रायपुर) थे। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग के रजिस्ट्रार डॉ. भूपेंद्र कुलदीप, महाविद्यालय के प्रशासक रेव. फादर डॉ. पी. एस. वर्गीस, प्राचार्य डॉ. शाइनी मेंडोस तथा उपप्राचार्य एवं रसायन विभागाध्यक्ष डॉ. जेम्स मैथ्यू विशेष रूप से उपस्थित रहे।

    इस अवसर पर महाविद्यालय प्रशासक ने अपने उद्बोधन में कहा कि शिक्षा का मुख्य उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास करना भी है। महाविद्यालय की प्राचार्या ने सभी अतिथियों का अभिनंदन करते हुए कहा कि इस प्रकार की संगोष्ठियां विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए समृद्धि प्रदान करती हैं। शिक्षा विभाग की विभागाध्यक्ष एवं संयोजिका डॉ. दीप्ति संतोष ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। प्रथम सत्र में मुख्य अतिथि डॉ. अलका पांडा ने “पेडागॉजिकल स्किल्स: ए फ्रेमवर्क फॉर ट्रांसफॉर्मिंग टीचर एजुकेशन अंडर NEP 2020” विषय पर विस्तार से चर्चा की।

    इसके पश्चात डॉ. हरिकेश सेनापति ने अपने वक्तव्य में NEP 2020 के संदर्भ में समग्र एवं समावेशी विकास पर बल देते हुए कहा कि शिक्षक शिक्षा का उद्देश्य केवल परिणाम प्राप्त करना नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सभी तक पहुंचाना है। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग के कुल सचिव ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही गुण विकसित होने चाहिए जो समाज के लिए उपयोगी सिद्ध हों।

    द्वितीय सत्र में डॉ. शिशिरकान्त भट्टाचार्य ने अपने वक्तव्य में प्रोफेशनल एथिक्स एंड प्रोफेशनलिज्म विषय से संबंधित अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने शिक्षक शिक्षा के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का समाधान भी किया गया। सभी अतिथियों को स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। प्रथम सत्र में कार्यक्रम की सह-संयोजिका डॉ. रीमा देवांगन तथा द्वितीय सत्र में डॉ. सोफिया पॉपली द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

    विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए प्राध्यापकों एवं प्रतिभागियों ने विषय से संबंधित अपने शोध पत्र भी प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का सफल संचालन शिल्पा मलिक एवं स्नेहा सेठी राजे ने किया। शुभांग दास, रोबिन एक्का, योगेश, निकिता तथा शिक्षा विभाग के सभी विद्यार्थियों का कार्यक्रम में विशेष योगदान रहा।

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