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    *अमेरि में जमीन और निस्तार मार्ग को लेकर बढ़ा विवाद: प्रमोद टंडन बोले– “पूरी जमीन मेरी, रास्ता मैंने खुद दिया था*

     

     

    बिलासपुर। शहर के अमेरी क्षेत्र में जमीन और निस्तार मार्ग को लेकर नया विवाद सामने आया है। क्षेत्र के निवासी प्रमोद टंडन, जो पिछले कई वर्षों से यहां निवासरत हैं, की लगभग तीन एकड़ निजी जमीन को लेकर उनके परिवार के सदस्यों के साथ मतभेद की स्थिति बन गई है। मामला तब तूल पकड़ गया जब परिवार के कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि प्रमोद टंडन ने जमीन के आगे बाउंड्री वॉल निर्माण कर निस्तार का रास्ता बंद कर दिया है।

    मिली जानकारी के अनुसार, अमेरी क्षेत्र में लंबे समय से स्थानीय लोग जिस मार्ग का उपयोग आवा-जाही और निस्तार के लिए करते आ रहे थे, वह रास्ता प्रमोद टंडन की निजी जमीन से होकर गुजरता है। बताया जाता है कि उन्होंने स्वयं की इच्छा से और जनहित को ध्यान में रखते हुए अपनी जमीन से रास्ता उपलब्ध कराया था, ताकि क्षेत्रवासियों को सुविधा मिल सके।

    परिवार की आपत्ति, लगाया रास्ता रोकने का आरोप

    प्रमोद टंडन के परिवार के कुछ सदस्यों का कहना है कि हाल ही में बाउंड्री वॉल का निर्माण कर मार्ग को सीमित कर दिया गया है, जिससे आवागमन प्रभावित हुआ है। उनका आरोप है कि इससे लोगों को असुविधा हो रही है और पारंपरिक निस्तार का मार्ग बाधित हो गया है।

    प्रमोद टंडन का पक्ष

    वहीं, प्रमोद टंडन ने मीडिया के समक्ष सभी आवश्यक राजस्व दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए स्पष्ट किया कि संबंधित पूरी जमीन उनके स्वामित्व में है। उन्होंने कहा कि रास्ता किसी सरकारी आदेश या अधिग्रहण के तहत नहीं, बल्कि उनकी स्वेच्छा से दिया गया था।

    टंडन का कहना है, “यदि जमीन मेरी है तो उसकी सुरक्षा और सीमांकन का अधिकार भी मेरा है। मैंने लोगों की सुविधा के लिए रास्ता दिया था, किसी का अधिकार छीनने का उद्देश्य नहीं है।”

    उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी प्रकार की कानूनी या प्रशासनिक जांच होती है तो वे पूरा सहयोग करेंगे।

    प्रशासन की भूमिका पर नजर

    फिलहाल मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से उपयोग में रहे रास्ते को लेकर यदि विवाद उत्पन्न हुआ है तो राजस्व विभाग द्वारा स्थल निरीक्षण और दस्तावेजों की जांच कर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

    शांतिपूर्ण समाधान की उम्मीद

    क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि पारिवारिक और भूमि संबंधी इस विवाद का समाधान आपसी सहमति या प्रशासनिक हस्तक्षेप से जल्द निकल आएगा, ताकि आम जनता को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

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