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    *संकट में साथी के साथ खड़ा प्रेस क्लब: अध्यक्ष अजीत मिश्रा के नेतृत्व में CM से आर्थिक सहायता की मांग*

    बिलासपुर।

    सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल प्रेस क्लब सदस्य सरफराज मेमन के सुपुत्र मोहम्मद अल्फाज के इलाज को लेकर बिलासपुर प्रेस क्लब ने संवेदनशीलता, एकजुटता और सामाजिक जिम्मेदारी का मजबूत उदाहरण पेश किया है। इस पूरे घटनाक्रम में पत्रकारों ने यह साबित कर दिया कि वे सिर्फ खबरों तक सीमित नहीं, बल्कि अपने साथियों के हर सुख-दुख में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहते हैं।

    जानकारी के अनुसार, मोहम्मद अल्फाज एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए, जिसमें उनके सिर में गहरी चोट आई है। उन्हें तत्काल बिलासपुर के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार स्थिति गंभीर बनी हुई है और बेहतर उपचार के लिए आर्थिक सहयोग की आवश्यकता भी सामने आई है।

    घटना की सूचना मिलते ही बिलासपुर प्रेस क्लब हरकत में आ गया। अध्यक्ष अजीत मिश्रा के नेतृत्व में पूर्व अध्यक्ष तिलकराज सलूजा, पदाधिकारी, कार्यकारिणी सदस्य और बड़ी संख्या में पत्रकारों ने पीड़ित परिवार से संपर्क कर हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। प्रेस क्लब के सदस्यों ने व्यक्तिगत स्तर पर भी सहयोग शुरू किया और पूरे पत्रकार समाज से आगे आने की अपील की।

    इसी कड़ी में प्रेस क्लब का एक प्रतिनिधिमंडल अध्यक्ष अजीत मिश्रा के नेतृत्व में सर्किट हाउस पहुंचा, जहां उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को पूरे मामले से अवगत कराते हुए घायल युवक के समुचित इलाज के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग की और एक ज्ञापन भी सौंपा।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस संवेदनशील मामले को गंभीरता से लेते हुए गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार की ओर से हरसंभव मदद उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि घायल युवक का इलाज बिना किसी बाधा के जारी रह सके।

    इस दौरान प्रेस क्लब के पदाधिकारी, कार्यकारिणी सदस्य और शहर के कई वरिष्ठ पत्रकार मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि यह केवल एक परिवार की समस्या नहीं, बल्कि पूरे पत्रकार समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में हर सदस्य एकजुट होकर सहयोग करेगा और पीड़ित परिवार को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।

    प्रेस क्लब की इस पहल ने समाज के सामने एक सकारात्मक संदेश प्रस्तुत किया है। यह घटना दर्शाती है कि पत्रकारिता केवल पेशा नहीं, बल्कि एक परिवार है, जहां हर सदस्य एक-दूसरे के लिए खड़ा रहता है। संकट के समय दिखाई गई यह एकजुटता न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि सामाजिक सरोकारों के प्रति पत्रकारों की प्रतिबद्धता को भी उजागर करती है।

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