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संतोष मिश्रा 8.3.2026..
बिलासपुर।
एक ओर जहां पूरे देश में आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाकर महिलाओं के सम्मान, अधिकार और सशक्तिकरण की बातें की जा रही हैं, वहीं बिलासपुर के लिंगियाडीह क्षेत्र में महिलाओं की पीड़ा कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। अपने घर और आशियाने को बचाने के लिए यहां की महिलाएं पिछले 108 दिनों से लगातार धरने पर बैठी हुई हैं, लेकिन अब तक शासन-प्रशासन की ओर से उनकी समस्याओं की ओर कोई ठोस ध्यान नहीं दिया गया है।
धरने पर बैठी महिलाओं का कहना है कि वे अपने परिवार और बच्चों के साथ अपने घरों को बचाने के लिए लगातार संघर्ष कर रही हैं। ठंड, गर्मी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद वे आंदोलन से पीछे नहीं हटीं, लेकिन उनकी आवाज अब तक जिम्मेदारों तक नहीं पहुंच पाई है।
इस आंदोलन का नेतृत्व पार्षद दिलीप पाटिल कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब पूरा देश महिला दिवस पर महिलाओं के सम्मान की बात कर रहा है, तब लिंगियाडीह की महिलाएं पिछले 108 दिनों से सड़क पर बैठकर अपने अधिकारों के लिए लड़ रही हैं, लेकिन शासन-प्रशासन की उदासीनता के कारण उनकी मांगों पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि महिला दिवस के दिन भी इन महिलाओं की उपेक्षा होना उनके सम्मान के साथ अन्याय और अपमान के समान है।
पार्षद दिलीप पाटिल के नेतृत्व में चल रहा “लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन” लगातार जारी है। आंदोलन में शामिल महिलाओं ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द उनकी समस्याओं का समाधान किया जाए और उनके घरों को बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि उन्हें अपने ही आशियाने से बेघर होने का डर न रहे।
महिलाओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका आंदोलन अनवरत जारी रहेगा। ऐसे में महिला दिवस के अवसर पर उठ रहे ये सवाल प्रशासन और समाज दोनों के लिए विचार करने योग्य हैं कि आखिर महिलाओं के सम्मान की बातें जमीनी स्तर पर कब साकार होंगी।
