
बिलासपुर, 24 फरवरी 2026।
छत्तीसगढ़ राज्य में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के अधिकारी एवं कर्मचारी अपनी लंबित मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन कामबंद हड़ताल के दूसरे दिन भी डटे रहे। वेतन विसंगति, अपूर्ण वेतन भुगतान तथा वैधानिक सेवा-लाभों की बहाली की मांग को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब निर्णायक चरण में पहुंच गया है।
संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि 16 से 20 फरवरी 2026 तक पांच दिवसीय कामबंद हड़ताल के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन से स्पष्ट, लिखित और समयबद्ध समाधान की अपेक्षा की गई थी, लेकिन इस अवधि में कोई ठोस और क्रियान्वयन योग्य निर्णय नहीं लिया गया। इसके बाद विवश होकर आंदोलन को अनिश्चितकालीन स्वरूप देना पड़ा।
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कुलपति से वार्ता रही निष्फल
अनिश्चितकालीन हड़ताल के पहले दिन संघ प्रतिनिधिमंडल की कुलपति से शिष्टाचार भेंट-वार्ता हुई। वार्ता के दौरान प्रशासन की ओर से बताया गया कि समस्याओं के निराकरण के लिए राज्य शासन से पत्राचार जारी है, परंतु समयबद्ध समाधान देने से असहमति जताई गई।
संघ ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक पूर्ण वेतन भुगतान और वैधानिक सेवा-लाभों पर ठोस, लिखित एवं समयसीमाबद्ध आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक हड़ताल समाप्त नहीं की जाएगी। किसी ठोस आश्वासन के अभाव में वार्ता विफल रही।
न्यायालयीन आदेशों व दिशा-निर्देशों की अनदेखी का आरोप
संघ ने आरोप लगाया है कि KVK अधिकारियों/कर्मचारियों के वेतन एवं सेवा-लाभों के संबंध में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के मूल दिशा-निर्देश, भारत सरकार के कृषि मंत्रियों एवं कृषि सचिव स्तर के पत्र, तथा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर के आदेश पहले से विद्यमान हैं, जिनका पालन अनिवार्य है। इसके बावजूद अब तक समुचित अनुपालन नहीं किया गया है।
“KVK कर्मचारी विश्वविद्यालय की अमानत”
संघ ने स्पष्ट किया कि KVK के अधिकारी एवं कर्मचारी विश्वविद्यालय अधिनियम एवं परिनियम के तहत विश्वविद्यालय द्वारा नियुक्त हैं। नियुक्तिकर्ता संस्था होने के नाते पूर्ण वेतन, भत्तों और सेवा-लाभों की संपूर्ण वित्तीय एवं प्रशासनिक जिम्मेदारी विश्वविद्यालय की है। संघ का कहना है कि विश्वविद्यालय के अन्य कर्मचारियों के समान लाभ दिए जाएं और समझौता ज्ञापन (MoU) की शर्तों का पालन किया जाए।
राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए संघ प्रतिनिधिमंडल ने महामहिम राज्यपाल एवं कुलाधिपति से शिष्टाचार भेंट के लिए समय देने का निवेदन पत्र प्रेषित किया है, ताकि न्यायोचित और स्थायी समाधान की दिशा में मार्गदर्शन प्राप्त हो सके।
शांतिपूर्ण आंदोलन का दावा
संघ ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और अनुशासित है। कर्मचारियों के सम्मान, आजीविका और वैधानिक अधिकारों पर किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं होगा। साथ ही चेतावनी दी गई है कि हड़ताल के दौरान उत्पन्न प्रशासनिक, शैक्षणिक और प्रसारगत अव्यवस्थाओं की पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।
संघ ने विश्वविद्यालय प्रशासन से पुनः मांग की है कि तत्काल लिखित एवं समयबद्ध निर्णय लेकर KVK अधिकारियों/कर्मचारियों का पूर्ण वेतन और सभी वैधानिक सेवा-लाभ बहाल किए जाएं, ताकि आंदोलन समाप्त हो और किसानों को कृषि विज्ञान केंद्रों की सेवाएं फिर से निर्बाध रूप से मिल
