
बिलासपुर।
छत्तीसगढ़ी सिनेमा को एक नई दिशा और पहचान देने में अग्रणी भूमिका निभा रही आर्यन फ़िल्म प्रोडक्शन के बैनर तले निर्मित फ़िल्म “सपना” का पोस्टर विमोचन बेलतरा विधायक श्री शुशांक शुक्ला के कर-कमलों द्वारा गरिमामयी वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के दौरान फ़िल्म निर्माण से जुड़े कलाकारों, साहित्यकारों एवं कला प्रेमियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
पोस्टर विमोचन अवसर पर डॉ. एल.सी. माधरिया, सुप्रसिद्ध लेखिका ऋतु साहू तथा फ़िल्म के निर्देशक रामा नन्द तिवारी विशेष रूप से उपस्थित रहे। अतिथियों ने आर्यन फ़िल्म प्रोडक्शन की उस सोच और प्रतिबद्धता की सराहना की, जिसके तहत समाज से जुड़े संवेदनशील विषयों को सशक्त सिनेमाई माध्यम से दर्शकों तक पहुँचाया जा रहा है।
फ़िल्म “सपना” एक गरीब किसान और उसकी बेटी के संघर्ष, सपनों और उम्मीदों की भावनात्मक व प्रेरणादायक कहानी है। यह फ़िल्म न केवल मनोरंजन करती है, बल्कि सामाजिक यथार्थ, मेहनत और आत्मविश्वास का सशक्त संदेश भी देती है। आर्यन फ़िल्म प्रोडक्शन ने सीमित संसाधनों के बावजूद विषय चयन, प्रस्तुति और तकनीकी गुणवत्ता में उच्च मानक स्थापित किए हैं।
फ़िल्म में आंचल पाण्डेय, प्रिशा पाण्डेय, वैष्णवी पाण्डेय, तारा यादव, महेंद्र सूर्यवंशी, नरेंद्र सिंह चंदेल, डॉ. सुनंदा मरावी, सुनील पाण्डेय, सोनू महंत एवं राकेश तिवारी ने अपने सशक्त अभिनय से पात्रों को जीवंत किया है। सभी कलाकारों का अभिनय फ़िल्म को और अधिक प्रभावशाली बनाता है।
फ़िल्म को क्रिएटिव सपोर्ट खुशी देवांगन का मिला है, जबकि नृत्य धारा फाउंडेशन, आशीर्वाद हॉस्पिटल, महेंद्र सूर्यवंशी एवं महेंद्र ट्रैक्टर शोरूम का सहयोग फ़िल्म निर्माण में महत्वपूर्ण रहा।
फ़िल्म की डीओपी एवं एडिटिंग जितेन्द्र सिदार द्वारा की गई है, वहीं ‘द बाइट घराना’ द्वारा तैयार किया गया बैकग्राउंड म्यूज़िक फ़िल्म की भावनात्मक गहराई को और सशक्त बनाता है।
गौरतलब है कि फ़िल्म “सपना” पहले ही बुंदेलखंड फ़िल्म फेस्टिवल, खजुराहो फ़िल्म फेस्टिवल और टैगोर फ़िल्म अवार्ड जैसे प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी है। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि आर्यन फ़िल्म प्रोडक्शन न केवल क्षेत्रीय सिनेमा को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि उसे राष्ट्रीय पहचान भी दिलाने में सफल हो रहा है।
आर्यन फ़िल्म प्रोडक्शन का यह प्रयास छत्तीसगढ़ी सिनेमा के लिए एक सकारात्मक संकेत है, जो आने वाले समय में और अधिक सार्थक, सामाजिक एवं गुणवत्तापूर्ण फ़िल्मों की उम्मीद जगाता है।
