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    *हिंदी साहित्य का मौन स्तंभ गिरा: ज्ञानपीठ सम्मानित कवि-लेखक विनोद कुमार शुक्ल का निधन*

    हिंदी साहित्य का मौन स्तंभ गिरा: ज्ञानपीठ सम्मानित कवि-लेखक विनोद कुमार शुक्ल का निधन

    रायपुर।

    छत्तीसगढ़ के राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वरिष्ठ कवि, कथाकार और हिंदी साहित्य के विशिष्ट हस्ताक्षर विनोद कुमार शुक्ल का मंगलवार, 23 दिसंबर की शाम राजधानी रायपुर स्थित एम्स में निधन हो गया। उनके निधन से न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि समूचे देश के साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। उन्हें उनकी सहज, संवेदनशील और मानवीय भाषा शैली के लिए विशेष रूप से जाना जाता था।

    विनोद कुमार शुक्ल का जन्म 1 जनवरी 1937 को छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में हुआ था। बीते कई दशकों से वे रायपुर में निवासरत रहकर निरंतर साहित्य सृजन में सक्रिय थे। उनकी रचनाओं में आम जनजीवन, निम्न-मध्यम वर्ग की पीड़ा, कस्बाई संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं की गहरी अभिव्यक्ति देखने को मिलती है।

    ज्ञानपीठ सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से हुए सम्मानित

    पिछले माह नवंबर में उन्हें देश के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से रायपुर में सम्मानित किया गया था। यह सम्मान उनके समग्र साहित्यिक अवदान को मान्यता देता है। इससे पूर्व वर्ष 1976-77 में मध्यप्रदेश शासन द्वारा उन्हें गजानन माधव मुक्तिबोध फेलोशिप प्रदान की गई थी।

    ‘नौकर की कमीज’ से मिली विशिष्ट पहचान

    गजानन माधव मुक्तिबोध फेलोशिप के अंतर्गत उन्होंने अपना कालजयी उपन्यास ‘नौकर की कमीज’ लिखा, जो वर्ष 1979 में प्रकाशित हुआ। यह उपन्यास समाज के निम्न-मध्यम वर्गीय जीवन और छत्तीसगढ़ के कस्बाई शहरों के यथार्थ को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करता है। इस उपन्यास पर सुप्रसिद्ध फिल्म निर्देशक मणि कौल ने वर्ष 1999 में इसी शीर्षक से फीचर फिल्म का निर्माण किया, जो आज भी चर्चित है और यूट्यूब पर उपलब्ध है। इस कृति का अनुवाद अंग्रेजी, फ्रेंच सहित कई भारतीय भाषाओं में किया जा चुका है।

    समृद्ध साहित्यिक कृतित्व

    विनोद कुमार शुक्ल के अन्य बहुचर्चित और बहुप्रशंसित उपन्यासों में खिलेगा तो देखेंगे (1996), दीवार में एक खिड़की रहती थी (1997), हरी घास की छप्पर वाली झोपड़ी, बौना पहाड़ (2011) तथा एक चुप्पी जगह (2018) शामिल हैं। उनकी रचनाएं सरल भाषा में गहन अर्थ और संवेदना समेटे हुए हैं।

    राष्ट्रीय स्तर पर मिला व्यापक सम्मान

    हिंदी साहित्य में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें समय-समय पर अनेक राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। इनमें मध्यप्रदेश सरकार का शिखर सम्मान, राष्ट्रीय मैथिलीशरण गुप्त सम्मान, मध्यप्रदेश कला परिषद का रजा पुरस्कार, भारत सरकार द्वारा प्रदत्त साहित्य अकादमी पुरस्कार तथा उत्तरप्रदेश सरकार के हिंदी संस्थान का हिंदी गौरव सम्मान प्रमुख हैं। उन्हें वर्ष 1999 में उपन्यास ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ था।

    शोक और श्रद्धांजलि

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एम्स पहुंचकर उनका हालचाल लिया था। उनके निधन की सूचना मिलते ही साहित्य जगत, कला प्रेमियों और पाठकों में शोक की लहर दौड़ गई। अनेक साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

    विनोद कुमार शुक्ल के निधन से हिंदी साहित्य में एक अविस्मरणीय शून्य उत्पन्न हुआ है। उनकी रचनाएं आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और संवेदना का अमूल्य स्रोत बनी रहेंगी।

    बिलासपुर पुलिस ग्राउंड में आयोजित कवि सम्मेलन में उपस्थित छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय उपमुख्यमंत्री अरुण साव. उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा सभी विधायक एवं युग कवि कुमार विश्वास और उनकी पूरी टीम ने मंच पर श्रद्धांजलि दी उसके पश्चात आज के इस कवि सम्मेलन को स्थगित कर दिया गया 

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