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    *अपनी आंखें बंद कर गईं, लेकिन दो ज़िंदगियों में रोशनी छोड़ गईं — ईश्वरी देवी का पुण्य नेत्रदान बना प्रेरणा*”

    अपनी आंखें बंद कर गईं, लेकिन दो ज़िंदगियों में रोशनी छोड़ गईं — ईश्वरी देवी का पुण्य नेत्रदान बना प्रेरणा”

    बिलासपुर।
    सच्ची सेवा वही है जो मृत्यु के बाद भी किसी का जीवन संवार दे। ऐसा ही एक प्रेरणादायक उदाहरण बनीं सिंधी कॉलोनी निवासी श्रीमती ईश्वरी देवी मेहरचंदानी, जिनका सोमवार सुबह आकस्मिक निधन हो गया। अपने जाने के बाद भी वे दो ज़िंदगियों को रोशनी देकर अमर हो गईं।

    उनके पुत्र मनोहर मेहरचंदानी ने इस भावुक क्षण में भी मानवता का परिचय देते हुए नेत्रदान का संकल्प लिया। उन्होंने इस बारे में सामाजिक कार्यकर्ताओं अजय टहल्यानी और हरिकिशन गंगवानी को जानकारी दी। तत्पश्चात ‘हैंड्स ग्रुप’ के अविनाश विधानी ने त्वरित पहल करते हुए सिम्स अस्पताल की टीम, जिसमें नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अन्नू तोमर और नेत्रदान सलाहकार धर्मेंद्र देवांगन शामिल थे, को ईश्वरी देवी के निवास स्थान पर भेजा। टीम ने कुशलता से नेत्रदान की प्रक्रिया पूर्ण की।

    सिंधी कॉलोनी पूज्य पंचायत के अध्यक्ष गोपाल सिंधवानी ने इस पुण्य कार्य की सराहना करते हुए कहा कि –
    “आज भी कई ऐसे लोग हैं, जिनकी आंखों में उजाले का इंतज़ार है। ईश्वरी देवी जी जैसे लोग मरने के बाद भी किसी के जीवन को रोशन कर जाते हैं, यह हम सभी के लिए प्रेरणा है।”

    हैंड्स ग्रुप व मेहरचंदानी परिवार के इस भावुक और महान कार्य ने समाज को यह संदेश दिया है कि —

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