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    *संजीवनी इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी में हुई हनुमान जी की प्राण प्रतिष्ठा, संस्थापक राकेश तिवारी और ऋषि केसरी की पहल ने रचा आध्यात्मिक इतिहास*

    संजीवनी इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी में हुई हनुमान जी की प्राण प्रतिष्ठा, संस्थापक राकेश तिवारी और ऋषि केसरी की पहल ने रचा आध्यात्मिक इतिहास

    बिलासपुर। गनियारी स्थित संजीवनी इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी एक बार फिर चर्चा में है, इस बार कारण बना है संस्थान परिसर में हनुमान जी की भव्य प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा। वैदिक मंत्रोच्चार, पूजन-अर्चन और भक्तिभाव से भरे इस कार्यक्रम ने न केवल परिसर को पावन बना दिया, बल्कि श्रद्धालुओं के मन को भी गहराई से स्पर्श किया।

     

    इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन में केंद्रीय राज्य मंत्री टोकन साहू और बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला विशेष रूप से शामिल हुए। उन्होंने संस्थान की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि युवा पीढ़ी को संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने का सशक्त माध्यम भी है।

     

    कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण हनुमान जी की विशाल और दिव्य प्रतिमा रही, जिसे श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा और जयकारों के साथ प्रतिष्ठित किया। पूजा के पश्चात भव्य आरती का आयोजन हुआ, जिसमें छात्र-छात्राएं, फैकल्टी, कर्मचारी और स्थानीय श्रद्धालु भारी संख्या में शामिल हुए।

     

    इस आयोजन की संपूर्ण रूपरेखा संस्था के संस्थापक राकेश तिवारी और प्रमुख सहयोगी ऋषि केसरी द्वारा तैयार की गई थी। दोनों ही व्यक्तित्वों ने न केवल चिकित्सा और फार्मेसी क्षेत्र में संस्थान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है, बल्कि अब आध्यात्मिक और सामाजिक क्षेत्रों में भी अपनी दूरदर्शिता और सकारात्मक सोच से उदाहरण पेश किया है।

     

    राकेश तिवारी और ऋषि केसरी की सोच यह रही कि जिस प्रकार महाबली हनुमान ने संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण की प्राण रक्षा की थी, उसी भावना के अनुरूप संजीवनी संस्थान भी आमजन को संजीवनी समान चिकित्सा और सेवा प्रदान कर सके। अब इस आध्यात्मिक आधारशिला के साथ यह संस्थान सेवा, शिक्षा और संस्कार का आदर्श केंद्र बनकर उभरा है।

     

    संस्थान में हनुमान मंदिर की स्थापना न केवल आस्था का प्रतीक बनेगी, बल्कि यह भविष्य में होने वाले हर कार्यक्रम और गतिविधि को भी आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करेगी। श्रद्धा, सेवा और संस्कार की त्रिवेणी अब संजीवनी संस्थान की पहचान बन गई है।

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