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    *अपोलो हॉस्पिटल्स ने वर्ल्ड इमरजेंसी मेडिसिन डे पर 1066 आपातकालीन सेवा पर केंद्रित शॉर्ट फिल्म लॉन्च की*

     

    अपोलो हॉस्पिटल्स ने वर्ल्ड इमरजेंसी मेडिसिन डे पर 1066 आपातकालीन सेवा पर केंद्रित शॉर्ट फिल्म लॉन्च की

    , 27 मई 2025:

    वर्ल्ड इमरजेंसी मेडिसिन डे के अवसर पर अपोलो हॉस्पिटल्स ने एक प्रभावशाली शॉर्ट फिल्म का अनावरण किया है, जो आपातकालीन स्थितियों में समय पर और सही मेडिकल सहायता की आवश्यकता को उजागर करती है। इस फिल्म के माध्यम से नागरिकों को यह संदेश दिया गया है कि आपात स्थिति में खुद वाहन चलाकर अस्पताल ले जाने के बजाय अपोलो की 1066 हेल्पलाइन पर कॉल करें, ताकि प्राथमिक उपचार तुरंत मरीज़ तक पहुँच सके।

     

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    फिल्म का प्रमुख संदेश है – “जब इलाज आपके दरवाज़े पर ही शुरू हो जाता है, तो गाड़ी क्यों चलाएं?” इसे नॉन-लीनियर फॉर्मेट में प्रस्तुत किया गया है, जिसमें दो समान परिस्थितियों की तुलना की गई है। एक दृश्य में परिवार खुद मरीज को अस्पताल ले जाता है, जिससे इलाज में देरी होती है। वहीं, दूसरे दृश्य में 1066 पर कॉल कर अपोलो की प्रशिक्षित इमरजेंसी टीम को बुलाया जाता है, जो मौके पर ही प्राथमिक उपचार शुरू करती है और मरीज़ को शीघ्रता से अस्पताल पहुंचाती है।

     

    अपोलो हॉस्पिटल्स की डायरेक्टर – स्ट्रेटेजी, सुश्री सिंदूरी रेड्डी ने कहा,

     

    > “हमारे व्यापक अस्पताल नेटवर्क और उन्नत एम्बुलेंस बेड़े के साथ, अपोलो इमरजेंसी सेवाएं वैश्विक मानकों पर आधारित हैं। हमारा लक्ष्य है कि हर व्यक्ति को समय पर जीवनरक्षक सहायता मिले। यह फिल्म इस बात की याद दिलाती है कि मेडिकल इमरजेंसी में 1066 पर कॉल करना एक निर्णायक कदम हो सकता है।”

     

     

     

    अपोलो हॉस्पिटल्स हर साल 3 लाख से अधिक आपातकालीन मामलों को संभालता है। भारत में 1066 हेल्पलाइन शुरू करने वाला पहला संस्थान होने के नाते, अपोलो की आपातकालीन सेवाएं अत्याधुनिक परिवहन, केंद्रीकृत समन्वय और अनुभवी मेडिकल टीमों पर आधारित हैं।

     

    अपोलो की एम्बुलेंसों में ECG, हार्ट मॉनिटरिंग, ऑक्सीजन सैच्युरेशन जैसे उपकरणों के साथ वेंटिलेटर की भी सुविधा उपलब्ध है। इनका उद्देश्य अस्पताल पहुंचने से पहले ही मरीज़ को चिकित्सा सहायता प्रदान करना है। आपातकालीन कर्मी विशेष रूप से स्ट्रोक, दिल का दौरा, आघात, बाल चिकित्सा दुर्घटनाओं और मातृ देखभाल जैसी जटिल स्थितियों से निपटने में प्रशिक्षित हैं।

     

    यह पहल सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक सामाजिक जागरूकता अभियान है — जिससे हर व्यक्ति यह जान सके कि संकट की घड़ी में सही निर्णय और सही समय पर मदद जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर तय कर सकते है

     

     

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