
बिल्हा (बिलासपुर): ब्लॉक कांग्रेस कमेटी तिफरा के अध्यक्ष श्री लक्ष्मीनाथ साहू ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जिला सहकारी बैंक, शाखा बिल्हा अंतर्गत गुमा सेवा सहकारी समिति में हुए लाखों रुपये के गंभीर वित्तीय घोटाले और चेकों में कूटरचना (फर्जीवाड़े) पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने इस मामले में शामिल दोषियों को तत्काल पद से निलंबित करने, निष्पक्ष आपराधिक जांच कराने तथा साक्ष्यों से छेड़छाड़ रोकने हेतु सख्त कदम उठाने की मांग की है।
जारी बयान में ब्लॉक अध्यक्ष श्री लक्ष्मीनाथ साहू ने बताया कि जिला सहकारी बैंक की बिल्हा शाखा अंतर्गत गुमा सेवा सहकारी समिति में शाखा प्रबंधक लक्ष्मण कौशिक, सुपरवाइजर हितेश सलूजा एवं तत्कालीन समिति प्रबंधक दिवंगत शरद कुमार कश्यप द्वारा परस्पर सांठगांठ कर सोसाइटियों के चेकों में काट-छांट व कूटरचना करके स्वीकृत राशि से अधिक राशि का अवैध आहरण किया गया है। इस धोखाधड़ी के जरिए शासन एवं निर्दोष किसानों की गाढ़ी कमाई के लाखों रुपये का चूना लगाया गया है।
श्री साहू ने आगे कहा कि इस संबंध में गुमा सोसाइटी के अध्यक्ष श्री राम कुमार बरगाहा द्वारा बिल्हा थाना में नामजद एफआईआर दर्ज कराई गई थी। परंतु अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि क्षेत्रीय बड़े नेताओं के राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक दबाव के कारण अब तक पुलिस एवं प्रशासन द्वारा कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई है। उल्टे आरोपी अग्रिम जमानत लेकर पुनः उन्हीं पदों पर विराजमान हैं, जिससे निष्पक्ष जांच पूरी तरह प्रभावित हो रही है और साक्ष्य व सबूत मिटाने का प्रयास किया जा रहा है।
ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष लक्ष्मीनाथ साहू ने मांग कि है कि :-
तत्काल प्रभाव से निलंबन: जांच को पारदर्शी बनाए रखने के लिए बिल्हा शाखा प्रबंधक लक्ष्मण कौशिक और सुपरवाइजर हितेश सलूजा को तत्काल निलंबित किया जाए।
उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच: मामले की निष्पक्ष जांच हेतु विशेष जांच टीम गठित की जाए तथा आरोपियों द्वारा जमानत का दुरुपयोग कर साक्ष्यों को प्रभावित करने के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
किसानों के हित की रक्षा: गबन की गई पूरी राशि की शीघ्र वसूली कर दोषियों पर सख्त आपराधिक धाराएं दर्ज की जाएं।
उग्र आंदोलन की चेतावनी:
ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष लक्ष्मीनाथ साहू ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शासन-प्रशासन द्वारा उक्त भ्रष्ट अधिकारियों पर निलंबन एवं निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई नहीं की जाती है, तो कांग्रेस किसान भाइयों एवं सोसाइटियों के पदाधिकारियों के साथ मिलकर क्षेत्र में व्यापक एवं उग्र आंदोलन, धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होगी, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन व प्रशासन की होगी..
