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    *पिछले 26 दिनों से सड़क में आकर आंदोलन कर रहे हैं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका.. लगा रही सरकार से गुहार कम से कम जीने लायक तो वेतन मिले*

    बिलासपुर / cgatoznews…कांग्रेस पार्टी द्वारा 2018 मे अपने जन घोषणा पत्र को तैयार करते समय सभी जिलो मे जाकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिकाओं से उनकी बाते सुनी और चुनावी जन घोषणा पत्र में वादा किया गया कि छत्तीसगढ़ में जैसे ही उनकी सरकार आयेगी तो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिकाओ को कलेक्टर दर पर मानदेय और नर्सरी शिक्षक पर उन्नयन किया जाएगा।कांग्रेस पार्टी के उसी वादे को याद दिलाते हुए वर्षों पुरानी मांग को पूरी करने राज्य सरकार से छत्तीसगढ़ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संघ मांग कर रहा है। ये बातें बिलासपुर प्रेस क्लब में पत्रकारों से चर्चा करते हुए संघ के पदाधिकारियों ने कही। प्रांतीय संयोजक देवेंद्र पटेल,जिला अध्यक्ष भारती मिश्रा,जिला सचिव शाकिरा खान ने बताया कि सरकार के चार साल बीत जाने के बाद भी वादा पूरा नही किया गया है।बार बार आंदोलन,ज्ञापन,मांग के बाद भी उनकी सुध नही ली जा रही है अब तो धैर्य की सीमा भी खत्म हो गई जिसके कारण छोटे बड़े सभी आठ संगठन मिलकर संयुक्त मंच का गठन कर सरकार को मांग पूरी करने 30 दिसम्बर को सूचना दे दी गई थी उसके बाद भी सुनवाई नही होने के कारण आंदोलन का रुख किया गया है। उन्होंने बताया कि शासन की हटधर्मिता के कारण प्रदेश के 46660 आंगनबाड़ी और 5814 मिनी आंगनबाड़ी केन्द्रो मे सभी कार्य दिनांक 23 जनवरी से ठप्प है। यहां कार्यरत 99134 महिला आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिकाये सड़क की लड़ाई लड़ रही है जीने लायक वेतन के लिये, बुढ़ापे का सहारा, समाजिक सुरक्षा के रुप मे मासिक पेशन के लिये, आकस्मिक मृत्यु और दुर्घटना पर बीमा के लिये, सरकार द्वारा सत्ता मे आने से पहले किये गये चुनावी वायदा को पूरा कराने के लिये जद्दोजहद कर रहे है। संघ ने बताया कि राजधानी रायपुर में धरना स्थल में बैठने की जगह नही दी गई जिसके कारण सभी जिला मुख्यालय में महिलाये कई जिलो में बिना टेन्ट, माईक, दरी के, धूप मे अनिश्चित कालिन हड़ताल मे बैठी है। 23 जनवरी से लेकर लगातार उनका आंदोलन चल रहा है आज प्रदर्शन का उनका 26 वां दिन है लेकिन मांगों के संबंध में विभागीय मंत्री मिलने को तैयार नही है।मुख्यमंत्री जी और ना ही सचिव से बात हो पा रही है सब के सब मौन है।यही कारण है कि एक लाख महिलाएं सड़क पर है। उन्होंने बताया कि इसके विपरीत संचालक द्वारा मांगो की पूर्ति के बजाय दमनकारी नीति अपनाई जा रही है। सेवा मे वापस आने के लिये 48 घन्टे का अल्टीमेटम दिया गया है। पदाधिकारियो को सेवा से पृथक करने की प्रशासनिक धमकी दी जा रही है। लेकिन धमकियों का आंगनवाड़ी की बहने डटकर मुकाबला कर रही है और जब तक मांग पूरी नही होगी तब तक आर पार की लड़ाई लड़ने को तैयार है।हमे तो बस जीने के लायक वेतन की ज़रूरत है। इसके बाद भी मांगो की पूर्ति नही होती हैं तो विधान सभा घेराव की रणनीति भी बनाई जा रही है। गौरतलब है कि देश मे आइसीडीएस की स्थापना 1974-75 में हुई है तब से अभी तक केन्द्र सरकार से 4500/- कार्यकर्ता को केन्द्र से 2000/- राज्य सरकार से कुल 6500/ और इसी तरह 2225/- केन्द्र से 1000/- राज्य सरकार से कुल 3225/- मानदेय प्राप्त हो रहा जिसे किसी भी स्थिति मे जीने लायक वेतन नही कहा जा सकता। हम मुख्यमंत्री जी से आग्रह करना चाहेगे की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका बहनो की मांगों की शीघ्र पूर्ति करे क्योकि वे कुछ नया मांग नही कर रहे जो आप ने कहां था उसी को पूरा करने को कहा जा रहा है।पत्रकारों से चर्चा के दौरान प्रांतीय संरक्षक पीआर कौशिक, कोषाध्यक्ष नीतू सोमावार सहित अन्य आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका मौजूद रहे।

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