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    *कँहा बेची पटवारी कौशल यादव ने सरकारी जमीन वो भी दो करोड़ में… लेनदेन की बातचीत का कथित ऑडियो आया सामने, ऑडियो में बड़े अधिकारियों समेत कई लोगो के नाम हैं शामिल पढ़े पूरी खबर*

    बिलासपुर। Cgatoznews…सरकारी ज़मीनों को अवैध रूप से ख़रीदेने बेचेने का खेल पूरे ज़िले में धड़ल्ले से चल रहा है। ताज़ा मामला मंगला इलाके का है। यहाँ गाँव की ग्राम नौकर (कोटवार) को मिली सरकारी ज़मीन को धोखाधड़ी करके फ़र्ज़ी तरीके से बेच दिए जाने का आरोप पटवारी कौशल यादव पर लगाया गया है।

     

    55 वर्षीय ग्राम कोटवार प्रमिला मानिकपुरी ने बताया कि वे पढ़ी लिखी नहीं हैं, इसी बात का फ़ायदा उठाकर उस समय मंगला के पटवारी रहे कौशल यादव और उसके सहयोगी राहुल यादव ने मिलकर फ़र्ज़ी इकरारनामा बनाकर और कूटरचना करके उसको मिली सरकारी ज़मीन को गैरकानूरी तरीके से बेच दिया।

    पटवारी कौशल यादव द्वारा की गई इस धोखाधड़ी के खिलाफ़ कोटवार प्रमिला मानिकपुरी ने सिविल लाईन थाने में आवेदन दिया है। आवेदन के अनुसार जिस सरकारी ज़मीन को पटवारी कौशल यादव ने फ़र्ज़ी तरीके बेच दिया है वो भूमि ग्राम नौकर की हैसियत से मौजा मंगला प.ह.न.35 तहसील व ज़िला बिलासपुर छ.ग. में खसरा नंबर 658, 1061, 1074, 1103/1, 1176, 1194 कुल रकबा 0.860 हेक्टेयर भूमि राजस्व अभिलेखों में बी -1 खसरा में दर्ज है। कोटवार प्रमिला यादव ने बताया कि “जब कौशल यादव मंगला का पटवारी था तब मैंने उनसे 11 हज़ार रुपए उधार लिए थे और पगार मिलने पर रुपये लौटा देने की बात कही थी। उधार के इन्ही 11 हज़ार रुपयों की लिखापढ़ी करने के लिए पटवारी कौशल यादव ने कोरे काग़ज़ पर मुझसे हस्ताक्षर करवाए थे। अब अखबार में छपी आम सूचना से मुझे जानकारी मिली है कि मुझे मिली सरकारी ज़मीन को फ़र्ज़ी तरीके से बेच दिया गया है”।

     

    मोपक पटवारी रहते हुए कौशल यादव पर सरकारी ज़मीन को 2 करोड़ में बेचने का आरोप

     

    मंगला की ही तरह मोपका पटवारी रहते हुए भी कौशल यादव पर सरकारी ज़मीन को कूटरचना कर फ़र्ज़ी तरीके से बेचने का आरोप लगा है। आवेदकगण उत्तम कुमार सुमन, विपुल सुभाष नागोशे और कुमार दास ने राजस्व मंत्री एवम् अन्य वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को आवेदन देकर शिकायत की है कि पटवारी हल्का नम्बर 29 मोपका में पटवारी रहने के दौरान कौशल यादव ने उन्हें एक ज़मीन दिलाई थी इस सौदे में पटवारी कौशल यादव ने डी.एस.सी. करवाने के लिए 2500000 रुपये, सीमांकन के लिए 2500000 रुपये और नमान्तरण करवाने के लिए 2500000 रुपये लिए थे। आवेदकों ने बताया कि नामान्तरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए पटवारी कौशल यादव उनसे और पैसों की मांग कर रहा है।

     

    कौशल यादव की कथित कॉल रिकॉर्डिंग आई सामने

     

    मोपका पटवारी रहते हुए कौशल यादव द्वारा किए गए सरकारी ज़मीन के फ़र्ज़ीवाड़े की पुष्टि करने वाली एक कॉल रिकॉर्डिंग भी सामने आई है। इस कॉल रिकॉर्डिंग में पटवारी कौशल यादव ने लाखों रुपयों के लेनेदेन की बात स्वीकार की है।

    इस कॉल रिकॉर्डिंग में पटवारी कौशल यादव और क्रेता के बीच लेनदेन की बात हो रही है। इस बातचीत में पटवारी कौशल यादव बिलासपुर में रह चुके एक बड़े अधिकारी समेत कई अन्य लोगों का नाम लेकर स्पष्ट रूप से ये कहते सुना जा सकता है कि “पैसों का बंटवारा सब के बीच हुआ है”।

     

    किसके संरक्षण में कर रहा है सरकारी ज़मीनों की बिक्री

     

    ये तो सिर्फ़ दो ही मामले हैं, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पटवारी कौशल यादव को जिस भी हल्का नंबर में पोस्टिंग मिलती है, ये सभी जगहों पर ऐसे ही फ़र्ज़ीवाड़े करता है। तमाम आला अधिकारियों को कौशल यादव के फ़र्ज़ीवाड़ों से संबंधित शिकायतें मिल चुकी हैं लेकिन फिर भी अबतक इसपर कोई आँच नहीं आई है। पूरे ज़िले में ये बात चर्चा का विषय बनी हुई है कि आख़िर कलेक्टर द्वारा अब तक पटवारी कौशल यादव पर कठोर कार्रवाई क्यों नहीं की गई है। सूत्रों ने बताया कि कलेक्टर महोदय ख़ुद भी इस पटवारी से परेशान हैं लेकिन कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। तो क्या प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्रवाई न करने के लिए राजनीतिक दबाव है ? या मोटी मलाई के स्वाद ने सभी का मुह बन्द किया हुआ है?

     

    हमारे सूत्र ने बताया कि पूर्व में बिलासपुर के बड़े प्रशासनिक अधिकारी को तोहफ़े में इनोवा कार देने की बात कहकर पटवारी कौशल यादव रौब झाड़ा करता था कहता था “इनोवा गिफ़्ट में दिया हूं मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता”

     

    चार चक्का गाड़ियों जैसे मंहगे तोहफ़े और नकदी की हिस्सेदारी तो अपनी जगह है लेकिन बिलासपुर जिला प्रशासन में बैठे आला अधिकारियों को अब अपने मान सम्मान के गिरते ग्राफ़ को बचाने के लिए हरकत में आ जाना चाहिए और ऐसे भृष्टतम अधिकारियों पर कड़ी कारवाई कर एक अच्छा उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।

     

    जल्दी ही आने वाली इस खबर की अगली कड़ी में हम एक महत्वपूर्ण कॉल रिकॉर्डिंग जारी करेंगे।

    सरकारी ज़मीन को दो करोड़ में बेच दिया पटवारी कौशल यादव ने?
    लेनदेन की बातचीत का कथित ऑडियो आया सामने, ऑडियो में बड़े अधिकारियों समेत कईयों के नाम हैं शामिल

    मैं पैसा लेता हूँ और टाईम से काम कर के देता हूं मेरे जैसा दूसरा पटवारी नहीं मिलेगा : कथित ऑडियो में पटवारी कौशल यादव का कहना

    बिलासपुर। सरकारी ज़मीनों को अवैध रूप से ख़रीदेने बेचेने का खेल पूरे ज़िले में धड़ल्ले से चल रहा है। ताज़ा मामला मंगला इलाके का है। यहाँ गाँव की ग्राम नौकर (कोटवार) को मिली सरकारी ज़मीन को धोखाधड़ी करके फ़र्ज़ी तरीके से बेच दिए जाने का आरोप पटवारी कौशल यादव पर लगाया गया है।

    55 वर्षीय ग्राम कोटवार प्रमिला मानिकपुरी ने बताया कि वे पढ़ी लिखी नहीं हैं, इसी बात का फ़ायदा उठाकर उस समय मंगला के पटवारी रहे कौशल यादव और उसके सहयोगी राहुल यादव ने मिलकर फ़र्ज़ी इकरारनामा बनाकर और कूटरचना करके उसको मिली सरकारी ज़मीन को गैरकानूरी तरीके से बेच दिया।

    पटवारी कौशल यादव द्वारा की गई इस धोखाधड़ी के खिलाफ़ कोटवार प्रमिला मानिकपुरी ने सिविल लाईन थाने में आवेदन दिया है। आवेदन के अनुसार जिस सरकारी ज़मीन को पटवारी कौशल यादव ने फ़र्ज़ी तरीके बेच दिया है वो भूमि ग्राम नौकर की हैसियत से मौजा मंगला प.ह.न.35 तहसील व ज़िला बिलासपुर छ.ग. में खसरा नंबर 658, 1061, 1074, 1103/1, 1176, 1194 कुल रकबा 0.860 हेक्टेयर भूमि राजस्व अभिलेखों में बी -1 खसरा में दर्ज है। कोटवार प्रमिला यादव ने बताया कि “जब कौशल यादव मंगला का पटवारी था तब मैंने उनसे 11 हज़ार रुपए उधार लिए थे और पगार मिलने पर रुपये लौटा देने की बात कही थी। उधार के इन्ही 11 हज़ार रुपयों की लिखापढ़ी करने के लिए पटवारी कौशल यादव ने कोरे काग़ज़ पर मुझसे हस्ताक्षर करवाए थे। अब अखबार में छपी आम सूचना से मुझे जानकारी मिली है कि मुझे मिली सरकारी ज़मीन को फ़र्ज़ी तरीके से बेच दिया गया है”।

    मोपक पटवारी रहते हुए कौशल यादव पर सरकारी ज़मीन को 2 करोड़ में बेचने का आरोप

    मंगला की ही तरह मोपका पटवारी रहते हुए भी कौशल यादव पर सरकारी ज़मीन को कूटरचना कर फ़र्ज़ी तरीके से बेचने का आरोप लगा है। आवेदकगण उत्तम कुमार सुमन, विपुल सुभाष नागोशे और कुमार दास ने राजस्व मंत्री एवम् अन्य वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को आवेदन देकर शिकायत की है कि पटवारी हल्का नम्बर 29 मोपका में पटवारी रहने के दौरान कौशल यादव ने उन्हें एक ज़मीन दिलाई थी इस सौदे में पटवारी कौशल यादव ने डी.एस.सी. करवाने के लिए 2500000 रुपये, सीमांकन के लिए 2500000 रुपये और नमान्तरण करवाने के लिए 2500000 रुपये लिए थे। आवेदकों ने बताया कि नामान्तरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए पटवारी कौशल यादव उनसे और पैसों की मांग कर रहा है।

    कौशल यादव की कथित कॉल रिकॉर्डिंग आई सामने

    मोपका पटवारी रहते हुए कौशल यादव द्वारा किए गए सरकारी ज़मीन के फ़र्ज़ीवाड़े की पुष्टि करने वाली एक कॉल रिकॉर्डिंग भी सामने आई है। इस कॉल रिकॉर्डिंग में पटवारी कौशल यादव ने लाखों रुपयों के लेनेदेन की बात स्वीकार की है।
    इस कॉल रिकॉर्डिंग में पटवारी कौशल यादव और क्रेता के बीच लेनदेन की बात हो रही है। इस बातचीत में पटवारी कौशल यादव बिलासपुर में रह चुके एक बड़े अधिकारी समेत कई अन्य लोगों का नाम लेकर स्पष्ट रूप से ये कहते सुना जा सकता है कि “पैसों का बंटवारा सब के बीच हुआ है”।

    किसके संरक्षण में कर रहा है सरकारी ज़मीनों की बिक्री

    ये तो सिर्फ़ दो ही मामले हैं, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पटवारी कौशल यादव को जिस भी हल्का नंबर में पोस्टिंग मिलती है, ये सभी जगहों पर ऐसे ही फ़र्ज़ीवाड़े करता है। तमाम आला अधिकारियों को कौशल यादव के फ़र्ज़ीवाड़ों से संबंधित शिकायतें मिल चुकी हैं लेकिन फिर भी अबतक इसपर कोई आँच नहीं आई है। पूरे ज़िले में ये बात चर्चा का विषय बनी हुई है कि आख़िर कलेक्टर द्वारा अब तक पटवारी कौशल यादव पर कठोर कार्रवाई क्यों नहीं की गई है। सूत्रों ने बताया कि कलेक्टर महोदय ख़ुद भी इस पटवारी से परेशान हैं लेकिन कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। तो क्या प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्रवाई न करने के लिए राजनीतिक दबाव है ? या मोटी मलाई के स्वाद ने सभी का मुह बन्द किया हुआ है?

    हमारे सूत्र ने बताया कि पूर्व में बिलासपुर के बड़े प्रशासनिक अधिकारी को तोहफ़े में इनोवा कार देने की बात कहकर पटवारी कौशल यादव रौब झाड़ा करता था कहता था “इनोवा गिफ़्ट में दिया हूं मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता”

    चार चक्का गाड़ियों जैसे मंहगे तोहफ़े और नकदी की हिस्सेदारी तो अपनी जगह है लेकिन बिलासपुर जिला प्रशासन में बैठे आला अधिकारियों को अब अपने मान सम्मान के गिरते ग्राफ़ को बचाने के लिए हरकत में आ जाना चाहिए और ऐसे भृष्टतम अधिकारियों पर कड़ी कारवाई कर एक अच्छा उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।

    जल्दी ही आने वाली इस खबर की अगली कड़ी में हम एक महत्वपूर्ण कॉल रिकॉर्डिंग जारी करेंगे।

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